Story of Sindoor Ganesh भगवान श्री गणेश को सिंदूर लगाने की कथा

Story of Sindoor Ganesh भगवान श्री गणेश को सिंदूर लगाने की कथा

आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार,

हमारे सबके प्रिय भगवान श्री गणेश की पूजा में सिंदूर क्यों इस्तेमाल होता है? भगवान श्री गणेश को सिंदूर क्यों लगाया जाता है? यह हम आज के इस लेख में एक पौराणिक कथा द्वारा जानेंगे.

गणेश जी को पूजा में तीन वस्तु है अत्यंत आवश्यक मानी गई है|  दूर्वा, सिंदूर और मोदक.  इसी तरह श्री गणेश की पूजा सिंदूर के बिना अधूरी मानी जाती है.

 वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ

 निर्विघ्नम कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित है | और तिथि में चतुर्थी तिथि गणेश जी को समर्पित है | इसी कारण अगर हम नीचे दिए गए हुए भगवान जी के नामों का जाप २१ दिन करें तो मन को शांति, एवं  मन में स्थिरता आती है.  मनमें आए स्थिरता के कारण हमें अपने जीवन के फैसले लेने में आसानी आती है.

गणपति जी को लड्डू, मोदक का भोग लगता है. उन्हें दूर्वा अर्पित की जाती है. माथे पर सिंदूर लगाते हैं.

गणेश जी को सिंदूर लगाते वक्त बोला जाने वाला मंत्र Ganesh ji Sindoor offer mantra


जो कोई भी गणेश जी की पूजा कर रहा हो,उसने सिंदूर का मंत्र बोलकर गणेश जी के माथे पर सिंदूर लगाना . एवं बाद में खुद के माथे पर सिंदूर से तिलक करना चाहिए.

सिंदूर शुभनाम रक्तम् सौभाग्यम् सुखवर्धनाम |

शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ||

गणेश जी के स्वरूप Forms of Ganesh Ji in Hindi

  • गजानन
  • गणपति
  • विनायक
  • लंबोदर
  • गौरी पुत्र
  • गणेश आदि

गणपति जी गणेश जी के नाम अर्थ के साथ Names of Ganesh Ji with meaning in Hindi

  1. बाल गणपति – भगवान गणेश जी का बाल स्वरूप. 
  2. भालचंद्र –  जिसके मस्तक पर अर्धचंद्र हो
  3. बुद्धि नाथ – सर्वश्रेष्ठ बुद्धि जिनमें समाहित हो
  4. धूम्रवर्ण – आंखों के आगे का अंधेरा ( धुवाँ)  उड़ाने वाले
  5. एक अक्षर – एकल अक्षर
  6. एकदंत – 1 दांत वाले
  7. गजकर्ण – हाथी की तरह कानो वाले
  8. गजवक्र – हाथी के जैसे सूंड वाले
  9. गजानन – हाथी के जैसे मुख वाले
  10. गजवस्त्र – हाथी के जैसे मुंह वाले
  11. गणाध्यक्ष – (शिव जी के) गणों के अध्यक्ष
  12. गणपति – सभी गणों के मालिक
  13. गौरी सूत – मां गौरी के बेटे
  14. लंबोदर – लंबी उधर याने बड़े पेट वाले
  15. मंगल मूर्ति – सभी शुभ कार्यों के देवता
  16. प्रथम पूज्य – कोई भी पूजा में इन्हीं को प्रथम स्थान है
  17. मूषक वाहन – जिनका सारथी मूषक हो
  18. सिद्धीदाता – इच्छाओं  और अवसरों के स्वामी
  19. सिद्धिविनायक – सफलता के स्वामी
  20. चतुर्भुज – चारभुजा वाले
  21. रक्त – लाल रंग के शरीर वाले
  22. विघ्नहर – बाधाओं को दूर करने वाले
  23. विघ्न नाशक – बाधाओं का अंत करने वाले
  24. विनायक – सबके भगवान
  25. विकट – अत्यंत विशाल
  26. वरद विनायक – सफलता के स्वामी
  27. चिंतामणि – चिंताओं को दूर करने वाले
  28. पितांबर – पीले वस्त्र को धारण करने वाले
  29. महाबल – अत्यंत बलशाली
  30. महागणपति – देवा दी देव

गणेश जी के 21 नाम मंत्र 21 Mantra of Ganesh Ji in Hindi

गणेश जी की पूजा एवं अभिषेक करते समय नीचे दिए गए 21 मंत्र का उच्चारण किया जा सकता है| अथर्वशीर्ष का प्रयोग भी अभिषेक के समय किया जाता है.

  • ॐ गणञ्जयाय नमः
  • ॐ गं गणपतये नमः
  • ॐ गं हेरम्बाय नमः
  • ॐ गं धरणीधराय नमः
  • ॐ गं महागणपतये नमः
  • ॐ गं लक्षप्रदाय नमः
  • ॐ गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः
  • ॐ गं अमोघसिद्धये नमः
  • ॐ गं अमृताय नमः
  • ॐ गं मंत्राय नमः
  • ॐ गं चिंतामणये नमः
  • ॐ गं निधये नमः
  • ॐ गं सुमंगलाय नमः
  • ॐ गं बीजाय नमः
  • ॐ गं आशापुरकाय नमः
  • ॐ गं वरदाय नमः
  • ॐ गं शिवाय नमः
  • ॐ गं काश्यपाय नमः
  • ॐ गं नन्दनाय नमः
  • ॐ गं वाचासिद्धाय नमः
  • ॐ गं दुण्ढिविनायकाय नमः
Story of Sindoori Ganesh

अष्टविनायक के नाम Name of Ashtvinayak Ganapati Ji with Meaning in Hindi

महाराष्ट्र में स्थित अष्टविनायक गणपति बहुत ही प्रसिद्ध है. इनके नाम और जगह नीचे लिख रही हूं

  1. मयूरेश्वर मंदिर – मोरगांव, पुणे जिला
  2. सिद्धिविनायक मंदिर – सिद्धटेक, अहमदनगर जिला
  3. बल्लालेश्वर मंदिर – पाली, रायगढ़ जिला
  4. वरदविनायक मंदिर – महाड, रायगढ़ जिला
  5. चिंतामणि मंदिर – थेऊर, पुणे जिला
  6. गिरिजात्मज मंदिर – लेण्याद्री, पुणे जिला
  7. विघ्नेश्वर मंदिर – ओझर, पुणे जिला
  8. महागणपति मंदिर – रांजणगांव, पुणे जिला

भगवान गणेश जी को सिंदूर लगाने की पौराणिक कथा Story of offering Sindoor to Ganesh Ji in Hindi

यह कथा द्वापर युग की है. एक बार चतुर्मुख वाले भगवान ब्रह्मा शयन कर रहे थे. जब उनकी निद्रा पूरी हुई, और उनको जँभाई आ गई. ठीक उसी समय उनके मुख से एक पुरुष प्रकट हुआ. जन्म लेते ही उसने त्रिलोक को  कंपा देने वाली गर्जना की. उसका शरीर लाल रंग का था.  ब्रह्मा जी ने उससे पूछा, “ तुम कौन हो?  तुम्हारा जन्म कहां हुआ?

उस पुरुष ने उत्तर दिया, “जब आप जँभाई ले रहे थे उसी वक्त में आपके मुख से प्रकट हुआ हु . इसीलिए मैं आपका पुत्र हूं| आप ही मेरा नाम करण कीजिए ! 

ब्रह्मा जी के पुत्र Son of Lord Brahma in Hindi

ब्रह्मा जी अपने पुत्र के सौंदर्य पर मुग्ध हो गए | उसके लाल रंग के शरीर के कारण ब्रह्मा जी ने उसका नाम सिंदूर रख दिया | और उससे वर देते हुए कहा, “ त्रिलोक में तुम्हें जो भी स्थान पसंद आए तुम वहीं पर रहना.  तुम्हारी बाहों में अत्यंत क्षमता होगी.  तुम अपनी भुजाओं में पकड़ कर किसे भी दबोच गे तो उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे . !”

वरदान पाने की खुशी में सिंदूर इतना बावला हो गया. कि उसने  ब्रह्मा जी को ही पकड़ना चाहा.  वह ब्रह्मा जी को ही अपनी बाहों में पकड़ द बेचने लगा.  उसकी इस कुचेष्टा को भांप कर ब्रह्मा जी दुखी हो गए | और उसे  श्राप दिया, “ सिंदूर !  अब तू असुर हो जा | सिंदूर प्रिय गजानन तेरे लिए अवतरित होकर तेरा वध करेंगे |”

 श्राप देकर ब्रह्मा जी वैकुंठ धाम भगवान श्री हरि के पास आए | उन्होंने घड़ी हुई घटना व्यथित स्वर में विष्णु को सुना दी | ब्रह्मा जी के पीछे पीछे सिंदूर भी अपनी भुजाओं का बल साबित करने विष्णु धाम पहुंच गया | विष्णु जी के समझाने पर भी जब सिंदूर मानने को तैयार ना था तब भगवान विष्णु जी ने सिंदूर को उकसा ते हुए भगवान शिव शंकर से युद्ध करने की सलाह दी .  बल से उन्मत्त हुआ सिंदूर समाधिष्ट भगवान भोलेनाथ के पास आ पहुंचा . भगवान शंकर के बाजू में  माता पार्वती बैठी हुई थी.  सिंदूर ने माता पर कुदृष्टि डाली.  उनकी वेणी पकड़कर खींचने लगा.  इससे भगवान शिव शंकर की समाधि भंग हो गई. 

भगवान गणेश का मयूरेश स्वरूप Mayuresh form of Lord Ganesh in Hindi

जब तक माता पार्वती ने मन ही मन गणेश जी को स्मरण किया. भगवान गणेश माता की पुकार से मयूरेश का स्वरूप धारण कर आ गए.  उन्होंने असुर से कहा, “ माता गिरिजा को तुम छोड़ दो. भगवान शिव के साथ युद्ध करो. इस युद्ध में जो विजयी होगा,  पार्वती उसी की होगी.”

अपने बल के अहंकार में सिंदूर ने भगवान शिव के साथ युद्ध आरंभ किया.  इस युद्ध में असुर पराजित हो गया. और पृथ्वी लोक पर चला गया.

माता पार्वती ने मयूरेश से पूछा , “आप कौन हैं ?”

ब्राह्मण वेशधारी मयूरेश अपने गणेश स्वरूप में प्रकट हुए. और माता से बोले, “मां !  मैं आपका पुत्र  गणेश हूं . द्वापर युग में शीघ्र ही में गजानन नाम से अवतरित होऊंगा , तब इस  दृष्ट दैत्य का संहार करूंगा. भक्तों की मनोकामना

को पूरा कर भक्तों को सुख शांति दूंगा. 

पृथ्वी लोक में आते ही सिंदूर ने अत्याचार करना शुरू कर दिया.  धर्म एवं सत्कर्म का नाश होने लगा.  चारों ओर हाहाकार मचने लगा. सभी देवताओं ने गुरु बृहस्पति के आदेश के अनुसार भगवान गणेश की स्तुति की.  विनायक की आराधना कर सिंदूर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए अनुरोध किया. गणपति जी ने प्रकट हो सभी को आश्वस्त किया और अंतर्धान हो गए.

श्री गणेश जी का गजानन अवतार Gajanan Avatar of Lord Ganesh in Hindi

कुछ समय बाद एक दिव्य बालक प्रकट हुआ. वह रक्तवर्ण,चारभुजा वाला एवं सूंड धारण किए हुए था.  उसके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान थे.  छोटी आंखें एवं बड़ा पेड़ था.उनके चरण कमलों पर  ध्वज, अंकुश, और कमल की रेखाएं थी.

भगवान गणेश जी ने अपने भक्तों राजा महिष्मति एवं रानी पुष्पीका के घर में अवतरित हुए. परंतु भगवान जी के रूप से भयभीत हो  गए.  और दूत के हाथों वन में छोड़ दिया. 

 परंतु वन में जब महर्षि पाराशर ने उसको देखा. तब वह तुरंत ही समझ गए यह कोई दिव्य शक्ति या परमात्मा का स्वरूप है. करबद्ध होकर उन्होंने शिशु की स्तुति की.  और उसे आश्रम में ले आए. पाराशर ऋषि की पत्नी वात्सल्या बालक को देख आनंदित हो गई.  दोनों तपस्वी बालक का पालन पोषण बड़े ही प्यार से करने लगे.  भगवान गजानंद के चरण मात्र से महर्षि का आश्रम दिव्य हो गया.

बालक  गजानन ने आयु के 9 वर्ष पूर्ण किए.  अपनी कुशाग्र बुद्धि से समस्त वेद, उपनिषद एवं शास्त्र में पारंगत हो गए.  सिंदूर की अत्याचार अब तक बहुत बढ़ चुके थे .

 गजानंद भगवान के जन्म का उद्देश्य दुष्टों का  एवं सिंदूर का विनाश था.  उन्होंने अपने  एक हाथ में पाश, दूसरे हाथ में परशु, और दोनों हाथों में कमल का फूल धारण किया. अपने वाहन मूषक पर बैठ वह सिंदूर के पास पहुंचे.  सिंदूर के समीप जाते ही उन्होंने अपना विराट रूप धारण किया. उनका रूप इतना विशाल था कि उनका मस्तक आसमान एवं पग पाताल लोक को छूने लगे.

भगवान जी ने शीघ्र ही सिंदूर एवं उसकी दानव सेना का अंत कर दिया. भगवान ने सिंदूर का रक्त अपने अंगों पर वोट दिया. 

तभी से भगवान गणेश सिन्दूरहा,सिन्दूरप्रिय एवं सिन्दूरवदन नाम से प्रसिद्ध हुए.

|| जय गणेश ||

धन्यवाद

गणेश चतुर्थी
पुण्यातील 5 मानाचे गणपती

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