होली क्यों और कैसे मनाएंगे Why and how to celebrate Holi

होली क्यों और कैसे मनाएंगे Why and how to celebrate Holi

आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार,

हर एक की रंगों के साथ अपनी एक कहानी निराली| 

सब मिल-जुल कर खेलते हैं रंगों भरी होली रंगीली ||

बुराई पर अच्छाई की जीत होती है सुनहरी,|

तभी तो हम सबको प्यारी होती है होली ||

आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं ||

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बसंत महीना लगता ही जैसे हर कोई राह देखने लग जाता है होली की, आखिर यह त्यौहार है रूठे हुए को मनाने का, और हमें यह सिखलाने का की हमेशा बुराई पर होती है जीत अच्छाई की !!

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होलिका का दहन किया जाता है | अगले ही दिन धौली वंदन यानी की होली मनाई जाती है | होली का त्यौहार सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार है | 

  • होलिका दहन 24 मार्च 2024 को पूर्णिमा वाले दिन किया जाएगा |
  • अगले दिन 25 मार्च 2025 को रंगों से होली का उत्सव मनाया जाएगा |

परिचय Holi Introduction In Hindi

होलिका का त्योहार भारत में प्राचीन समय से मनाया जाता है | यह त्यौहार कितना पुराना है इस बारे में तो हम कोई भी राय बन ही नहीं सकते | परंतु इतिहास के पन्नों में झांक कर देखा तो सदियों से यह त्यौहार मनाया जा रहा है | 

होली क्यों मनाई जाती है Why to celebrate Holi In Hindi

नीचे हम पुराने में दिए गए अपनी कर कहानी द्वारा यह जानने की कोशिश करेंगे की होली क्यों मनाई जाती है? हर एक कहानी में हमें यही संदेश मिलता है की होली का त्यौहार ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ का त्यौहार है | यह त्यौहार ‘असत्य की हार और सत्य की विजय’ का संदेश देता है | यह उत्सव दुराचार पर सदाचार के विजय का उदाहरण है | 

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होलिका दहन पूजा की विधि Holika Dahan Pooja Vidhi In Hindi

  • होलिका दहन वाले दिन सुबह जल्दी उठकर सुबह के सभी कार्य संपन्न करने चाहिए।
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह कर कर होलीका पूजन करना चाहिए |
  • गाय के गोबर से होलीका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाई जाती है | 
  • हमारे यहां पर गोवारी, लकड़ी, आदि से होलिका सजाई  जाती है |
  • पूजा की सामग्री के लिए रोली, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी,गेहूं का आटा, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, 5 से 7 तरह के अनाज और एक लोटे में पानी लें।
  • सूखे आटे से होलिका के आगे 7 गोली बनाए | हल्दी, मूंग बताशे नारियल चढ़ाएं | गुड, एक रुपए का सिक्का भी चढ़ाए | कच्चे सूत से के ईदगिर्द गोल घूम कर धागा चढ़ाए | फिर होलिका को गोल घूमते हुए जल चढ़ाएं | 
  • नरसिंह भगवान को याद कर उनका भी पूजन कीजिए |
  • अपने परिवार के खुशहाली के लिए, और जीत के लिए प्रार्थना कीजिए | 

होली का की कहानी Holi Ki Kahani 

कहानी 1 holi

राधा कृष्ण की कहानी Holi Radha -Krishna Story

होलिका का त्यौहार विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और माता राधा के प्रेम को समर्पित है | वसंत में एक दूसरे पर रंग डालना भगवान की एक लीला का अंग माना गया है | मथुरा वृंदावन में होली का त्यौहार राधा कृष्ण के रंग में रंग कर ही मनाया जाता है | नंदगांव और बरसाने में होली का त्योहार लठमार होली के नाम से मनाया जाता है | इस त्यौहार को देखने के लिए देश-विदेश से लोगआते हैं | 

यह त्यौहार हमें यह संदेश दे जाता है कि,रंग हो तो भगवान के प्यार के, भक्तिरंग में किस तरह रंग जा सकता है, यह सीखला जाता है | यहां पर लोगों का उत्साह देखा यह पता चलता है कि , भक्त किस तरह भक्ति के रंग में खुद को रंग लेता है, यह रंग सिर्फ भक्ति का ही नहीं तो विश्वास का, प्रेम का , भाव का रंग होता है | यही रंग तो भगवान को सबसे अधिक प्रिय है | 

होली के उत्सव पर सिर्फ होलिका का दहन ही नहीं बल्कि अहंकार,द्वेष, ईर्ष्या, संशय जैसी नकारात्मक भावना को छोड़ सद्भावना के साथ ठाकुर की कृपा पाने का यह एक अवसर है |

राधे राधे 

 

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कहानी 2 holi

माता पार्वती,भगवान शिव और कामदेव की कहानी Holi Mata Parvati, Bhagwan Shiv And Kamdev Story In Hindi 

माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या कर रही थी | परंतु देवाधिदेव महादेव तपस्या में लीन थे | उस समय कामदेव ने माता पार्वती की सहायता हेतु भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए उन पर पुष्पबाण चलाया | जिस कारण भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई और वह क्रोधित हो गए | क्रोधित होकर उन्होंने अपने तीसरे नेत्र खोल दिए, जिस कारण कामदेव भस्म हो गए | इस वक्त भगवान शिव ने पार्वती को देखा और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया |

इसी कारण होलिका का उत्सव वासनात्मक आकर्षण को जलाकर सच्चे प्रेम की जीत का उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है|

अपने पति के शरीर को भस्म होता देख रति विलाप करने लग गई | और अपने पति के जीवन दान के लिए भगवान शिव से गुहार करने लगी |भगवान शिव ने प्रसन्न होकर कामदेव को पुनर्जीवित किया , यह दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का दिन यानी होलि का दिन था | कामदेव की पीड़ा को कम करने के लिए इस दिन चंदन की लकड़ी दान देने का रिवाज इसी वजह से शुरू हुआ | कामदेव के पुनर्जीवित होने के खुशी में अगले दिन रंगों से त्योहार खेला जाता है |

कहानी 3 holi

श्री कृष्ण, कंस और पुतना की कहानी Holi Krishna , Kans And Putna Story In Hindi

कंस खुशी खुशी अपनी बहन देवकी की शादी वासुदेव के साथ कर विदा कर रहा था |

इस समय एक आकाशवाणी हो गई और उसमें कंस को पता चला कि देवकी की आठवीं संतान कंस की मृत्यु का कारण बनेगी |इस आकाशवाणी को सुनते ही कंस क्रोधित हो गया और उसने अपनी बहन बहनोई दोनों को मथुरा की जेल में कैद कर दिया |

विधि का विधान कौन बदल सकता है | देवकी और वासुदेव की सातों संतानों का कंस ने पैदा होते ही मार दिया करता था |  | इस तरह वह अपने पाप का घड़ा भर चुका था |

भगवान श्री कृष्ण ने देवकी की आठवीं संतान बन जन्म लिया | रातों-रात कारागार के द्वार खुल गए, अपने आप सभी रास्ते बनते चले गए ऐसे अपने प्रताप से वह अपने पिता वासुदेव के हाथों गोकुल यशोदा माता के गोद में आ गए | 

माता यशोदा नवजात पुत्री को जब कंस मारना चाह रहा था उस वक्त फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है |

यह सुनकर कंस ने सभी नवजात शिशु की हत्या हेतु पुतना नामक राक्षसी का सहारा लिया | पुतना सुंदर स्त्री का वेश धारण कर नवजात शिशुओं को स्तन-पान करने के बहाने लेकर विषपान कराकर मार देती | 

ऐसी कौन सी बात है जो भगवान से छुप सकती है |अतः भगवान श्री कृष्ण ने पूतना वध कर उसे मुक्ति दे दी | यह दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का दिन यानी होलिका का दिन था | पुतना को जलाया गया |और बुराई का अंत हो गया |इस खुशी में सभी गांव वालों नेरं गों से होली खेली |

कहानी 4 holi

प्रल्हाद और होलिका की कहानी Holi Prahlad And Holika Story In Hindi

विष्णु पुराण के अनुसार, प्रल्हाद के पिता हिरण्यकशिपु तपस्या कर भगवानसे वरदान प्राप्त किया था, कि वह “ ना पृथ्वी पर मरेगा ना आकाश में, ना घर में मरेगा ना घर के बाहर, ना दिन में मरेगा ना रात में, ना अस्त्र से मरेगा ना शस्त्र से, ना मनुष्य से मरेगा ना पशु से ” | 

ऐसा वरदान पाकर वह निकुंश और अहंकारी बन गया | वह स्वयं को भगवान समझने लगा अतः अपनी ही प्रजा पर अत्याचार करने लगा | परंतु उसका पुत्र प्रहलाद भगवान श्री नारायण का परम भक्त था | इसी कारण पिता पुत्र में मतभेद होते थे | प्रहलाद को  मारने के लिए हिरण्यकशिपुने बहुत प्रयास करें | 

अंत में उसने अपनी बहन होलिका का सहारा पुत्र को मारने के लिए लिया | होलिका के पास एक ऐसी चादर थी, जिसे ओढ़ने के बादकोई भी प्रकार की आज उसका कुछ बिगाड़ ना सकती थी | अतः होली का छोटे से प्रहलाद को लेकर लकड़ी की ढेर पर चादर ओढ़ कर बैठ गई | हिरण्यकशिपु के सैनिकों ने लकड़ी की ढेर को आग लगा दी | परंतु आंधी इस प्रकार चली की चादर प्रहलाद केअंग से लिपट गई और होली का पूरी तरह जल गई | यह दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का दिन यानी होलि का दिन था | 

इसी कारण इस दिन होली जलाई जाती है| बुराई का अंत किया जाता है |

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निष्कर्ष Conclusion Of Holi

द्वापर युग में अच्छाई या बुराई दो लोक में हुआ करते थे – आकाश और पाताल

सतयुग में अच्छाई या बुराई एक लोक में हुआ करते थे – राम और रावण

त्रेता युग में अच्छाई या बुराई एक परिवार से हुआ करते थे – युधिष्ठिर और दुर्योधन

मात्र कलयुग में अच्छाई या बुराई एक ही इंसान में आ गई है | पसंद अपनी है अच्छा बनाना है या बुरा !!!

इसी कारण यह कहा जाता है कि, होली का पर्व हमें यह याद दिलाता है  की ,  होली का त्यौहार ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ का त्यौहार है | यह त्यौहार ‘असत्य की हार और सत्य की विजय’ का संदेश देता है | यह उत्सव दुराचार पर सदाचार के विजय का उदाहरण है |

इसीलिए होली में अहंकार, द्वेष , मत्सरआदि इंसानों के अंदर के अवगुणों को जलाना चाहिए | ताकि अपना जीवन सुखमय तथा समाधानी हुए |

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धन्यवाद

अगर इस ब्लॉग में अज्ञानतावश किसी भी बात का उल्लेख रह गया हो, तो कृपया हमें कमेंट कर कर बताइए |

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