Kumbh Mela A Celebration of Faith, Harmony, and Astonishing Grandeur

कुंभ मेला

kumbh mela

Beyond Rituals: The Untold Stories of Kumbh Mela 2023 That Will Amaze You

Kumbh Mela 2023: A Celebration of Faith, Harmony, and Astonishing Grandeur!

सामान्यत: कुंभ मेला  माघ मास के शुक्ल पक्ष के स्नान समय के आस-पास आयोजित किया जाता है। इसमें लाखों श्रद्धालुओं को एकत्र करने का उद्देश्य होता है, जो धार्मिक स्नान करने, पूजा करने, और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए आते हैं।

यह आयोजन हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, जिसमें विशेष स्थान और धार्मिक परंपराओं को महत्वपूर्णता मिलती है।

12 साल में एक बार लगने वाला कुंभ मेला kumbh mela in 12 years

12 साल में एक बार लगने वाला कुंभ मेला बहुत ही शुभ माना जाता है | इसके पीछे दो कारण है |

एक पौराणिक कथा के अनुसार जब देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ तो मंथन से निकले अमृत के कलश को लेकर देवताओं और दानव में लड़ाई हो गई और इस संघर्ष में अमृत की चार बूंदे पृथ्वी पर गिर गई यह चार बूंदे हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरी और इन्हीं चार जगह पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है |

कुंभ का अर्थ भी कलश ही होता है | kumbh mela

इसी कथा के अनुसार यह मंथन 12 दिन चला और देवलोक के 12 दिन पृथ्वी के 12 वर्ष के बराबर है,  इसीलिए 12 वर्ष में ही कुंभ मेला का आयोजन होता है |

दूसरा कारण सनातन धर्म में बृहस्पति को देवगुरु माना जाता है | गुरु से ही गुरुत्वाकर्षण शब्द बना है| आदि गुरु शंकराचार्य ने 1500 साल पहले बिना किसी टेलिस्कोप के बताया था, कि बृहस्पति ग्रह को सूर्य का एक चक्कर 12 साल में पूरा करता है |

हर 12 साल बाद देवगुरु बृहस्पति के ज्ञान और मार्गदर्शन को सेलिब्रेट करने के लिए कुंभ मेला लगाया जाता है |   

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Kumbh mela kyu hota hai   कुंभ मेला का आयोजन क्यों होता है 

कुंभ मेला हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक धार्मिक और सांस्कृतिक मेला है जो हर तीन साल में एक नगर के रूप में आयोजित होता है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य विशेष धार्मिक त्योहारों पर समाज को एकत्रित करना और सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आत्मा को बढ़ावा देना है।

कुंभ मेला का आयोजन चार प्रमुख तीर्थस्थलों –

कुंभ मेला का आयोजन चार प्रमुख तीर्थस्थलों प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन, और नासिक में होता है, जिनमें प्रत्येक मेला चौबीस में एक बार होता है। kumbh mela

कुंभ मेला का नाम ‘कुंभ’ इसलिए है क्योंकि इसमें सन् 12 वर्षों में एक बार ब्रह्मा कुंभ कलश से अमृत पीने के लिए इन चार तीर्थस्थलों में आता है, जिससे इसका नाम ‘कुंभ’ पड़ा है।

यह मेला लाखों लोगों को एकत्र करने का समर्पण करता है, जिनमें संत, साधु, योगी, और आम लोग शामिल होते हैं। कुंभ मेला का एक अद्वितीय विशेषता यह है कि यह सभी वर्गों, जातियों और धर्मों के लोगों को एक साथ आत्मीयता का महत्वपूर्ण अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है।

  • उपयुक्तता: कुंभ मेला भगवान शिव के अपने अनुयायियों को एकत्र करने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है |
  • विशेषता: हरिद्वार कुंभ मेला में स्नान करने का महत्वपूर्ण अर्थ है, और लाखों लोग इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए एकत्र होते हैं।

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kumbh mela kya hota hai कुंभ मेला क्या होता है 

कुंभ मेला हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण और विशेष तीर्थयात्रा है जो हर तीन साल में एक बार आयोजित होती है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक समृद्धि को प्रोत्साहित करना है। कुंभ मेला चार प्रमुख तीर्थस्थलों पर होती है: प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन, और नासिक में।

इस मेले में लाखों लोग एकत्र होकर नदी घाटों पर श्रद्धा भाव से स्नान करते हैं, जिसे हम ‘कुंभ स्नान’ कहते हैं। इस स्नान को करने से विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक पुण्य प्राप्त होने का विश्वास है।

कुंभ मेला में सभी धार्मिक सम्प्रदायों के लोग एक साथ आते हैं और वहां भगवान की पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा, यह एक सांस्कृतिक मेला भी है जहां शिल्पकला, संगीत, और नृत्य का प्रदर्शन होता है।

कुंभ मेला को भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है और यह बड़े पैम्प, धार्मिक ग़तिविधियों और बड़े संगठन के साथ एक शांतिपूर्ण और आत्मीय वातावरण में होता है।

Kumbh mela kab aur kyu shuru hota hai कुंभ मेला कब और क्यों शुरू हुआ 

kumbh mela traditional story

कुंभ मेला हर तीन साल में एक बार होता है, और इसका आयोजन चार प्रमुख तीर्थस्थलों पर होता है: प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन, और नासिक में। कुंभ मेला विशेषकर अपने स्नानों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों लोग नदी घाटों पर एकत्र होकर श्रद्धा भाव से स्नान करते हैं। यहां आने वाले लोग मानते हैं कि इस स्नान से आध्यात्मिक और धार्मिक पुण्य प्राप्त होता है और उनके पापों का नाश होता है।

कुंभ मेला का आयोजन इसलिए होता है क्योंकि हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार, देवता और असुरों के सामरिक मंथन (समुद्र मंथन) के दौरान अमृत कलश को लेकर भगवान विष्णु द्वारा भगवान ब्रह्मा के पास गए थे। इसके दौरान कुंभ मेला में कुंभ स्नान करने वाले राक्षसों और देवताओं ने अमृत पान किया था।

कुंभ मेला का प्रारंभ हुआ था जब विष्णु जी के वाहन, गरुड़ ने अमृत कलश को लेकर भागा दौड़ते हुए इलाहाबाद के प्रयाग में एक विशेष स्थान पर अमृत गिराया था।  हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, कुंभ मेला हर तीन साल में वहीं पर होता है जहां इस घटना का हुआ था।

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Kumbh mela ka rahasya कुंभ मेला का रहस्य

कुंभ मेला को एक अद्वितीय और रहस्यमय घटना माना जाता है, जो हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व का स्रोत है। इसका रहस्य विभिन्न पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों से जुड़ा हुआ है।

  1. समुद्र मंथन: kumbh mela

कुंभ मेला का रहस्य मुख्यतः हिन्दू पौराणिक कथा “समुद्र मंथन” से जुड़ा है, जिसमें देवता और राक्षसों ने समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश की प्राप्ति के लिए सामरिक युद्ध किया था। कुंभ मेला में होने वाले स्नान को इस काथा के एक अद्वितीय पल की पुनरागमन के रूप में माना जाता है।

  1. अमृत कलश: kumbh mela

कुंभ मेला का आयोजन उस स्थान पर होता है जहां पौराणिक कथा के अनुसार अमृत कलश से गिरा था। लोग मानते हैं कि यहां स्नान करने से व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा को प्राप्त करता है और उसके पुण्य में वृद्धि होती है।

  1. अनुष्ठान और साधना: kumbh mela

कुंभ मेला के दौरान साधु-संत, योगी, और धार्मिक आचार्य भी आते हैं और अनुष्ठान, साधना, और ध्यान में लगे रहते हैं। इससे लोगों को साधना और आध्यात्मिक विकास के लिए प्रेरित किया जाता है।

कुंभ मेला का रहस्य इन अंशों में छिपा होता है और इसे हिन्दू सामाजिक, धार्मिक, और आध्यात्मिक विकास का महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाता है।

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2019 के कुंभ मेला का विवरण 2019 का kumbh mela

2019 का कुंभ मेला:

  • स्थान: हाल का कुंभ मेला प्रयाग (इलाहाबाद) में 2019 में हुआ था।
  • तारीख़: यह मेला 15 जनवरी से 4 मार्च 2019 तक चला था।
  • विशेषता: इस कुंभ मेले में अर्धकुंभ के रूप में जाना गया था, जिसे हिन्दू पंचांग के अनुसार 6 या 12 साल में एक बार होता है।

कुंभ मेला का आयोजन  स्थान और धार्मक पंचांग के आधार पर तय किया जात है |

यह महाकुंभ मेला एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है, जिसमें लोग अपने आत्मा को शुद्धि और धार्मिक साधना की दिशा में बढ़ाते हैं।

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