Govardhan Parikrama गोवर्धन परिक्रमा

Govardhan Parikrama गोवर्धन परिक्रमा

गोवर्धन परिक्रमा, यह नहीं बस एक पवित्र यात्रा है, बल्कि यह एक भावनात्मक अनुभव है, जिसमें भक्ति की अद्वितीयता और प्रेम का अनुभव होता है। यहां हर कदम पर एक अलग कहानी बसी होती है, जो दिल को छू जाती है।

जब आप पहली बार गोवर्धन को छूते हैं, तो मानो एक नया जीवन का आरंभ होता है। पहाड़ी की ऊँचाई से नीचे देखते ही आता है वह अद्वितीय सौंदर्य, जिसमें प्रकृति का सानिध्य हर तरफ महसूस होता है। गोपियाँ नाचती हैं, कृष्ण की बांसुरी का सुर हर कोने में बसा होता है। Govardhan Parikrama 

गोवर्धन परिक्रमा में एक अलग माहौल होता है, जिसमें हर भक्त अपने आप को भगवान के साथ जुड़ा हुआ महसूस करता है। पर्वत की सुरंगों में चलते हुए व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति की ओर बढ़ता है, और यह एक अनूठा आत्मा संयोजन का अहसास कराता है।

गोवर्धन परिक्रमा के दौरान, गिरिराज जी का विशेष ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर कदम पर आपका दिल उस महान पर्वत की ओर आकर्षित होता है, और आपमें एक अद्वितीय समर्पण उत्पन्न होता है। कृष्ण भगवान की लीलाएं और उनका प्रेम समझने का अनौपचारिक तरीका यही है, जब आप गोवर्धन परिक्रमा के माध्यम से उनके समीप पहुँचते हैं।

यह यात्रा हमें बताती है कि जीवन का सारा मतलब केवल आर्थिक सफलता नहीं होता, बल्कि भक्ति और प्रेम का सही मायने समझना जरूरी है। गोवर्धन परिक्रमा एक ऐसा साक्षात्कार है जो हमें अद्वितीय भगवान के साथ एक होने की भावना दिलाता है, और हमें जीवन को सरलता और प्रेम से जीने का मार्ग दिखाता है। Govardhan Parikrama

Govardhan Parikrama

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गोवर्धन परिक्रमा का इतिहास History Of Govardhan Parikrama

गोवर्धन परिक्रमा का इतिहास, एक अत्यंत पावन और भावनात्मक कहानी है, जो हमें अपनी भूमि के आदर्शों और धार्मिक महत्व की ओर मोड़ने का अवसर प्रदान करता है।

यह कहानी किसी राजा नहीं, किसी महापुरुष नहीं, बल्कि एक छोटे से गिरिराज नामक बच्चे की है, जो अपने प्रेम और भक्ति के बल पर महत्वपूर्ण बन गए। गिरिराज, जिन्हें हम गोवर्धन भी कहते हैं, वह भगवान कृष्ण के सर्वोत्तम भक्त थे।

एक बार, गोपियाँ और गोपाल नंद जी ने व्रज के वासियों के साथ साकंड मेला मनाने का निर्णय लिया। इस मेले में, गिरिराज ने अपनी अद्भुत लीलाएं दिखाकर भगवान कृष्ण की असीम महिमा को प्रकट किया।

एक दिन, भगवान कृष्ण ने गिरिराज को अपने अद्भुत आकार में प्रकट होकर गोवर्धन पर्वत की ओर इशारा किया। भक्तों के समुद्र में डूबने से बचाने के लिए, भगवान ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और उसे अपने हाथों में ले कर समुद्र के ऊपर ले गए। इस अद्वितीय कृपा के में, भक्तों ने गोवर्धन परिक्रमा का आयोजन किया।

गोवर्धन परिक्रमा में हम अपने दिल के साथ चलते हैं, और गिरिराज की महिमा का अहसास होता है। यह परिक्रमा हमें दिखाती है कि भगवान का साकार रूप हो या निराकार, उनका प्रेम हमें हमेशा बचाव और आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है।

इस प्रकार, गोवर्धन परिक्रमा हमें हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर हमें एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करती है, जिसमें हम अपने भगवान के साथ समर्पित होते हैं। गोवर्धन परिक्रमा एक ऐसा सफर है जो हमें हमारी आध्यात्मिक यात्रा में एक कदम और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। Govardhan Parikrama

गोवर्धन परिक्रमा क्यों की जाती है Govardhan Parikrama Kyu Ki Jaati Hai

गोवर्धन परिक्रमा एक अद्वितीय आध्यात्मिक सफर है जो हमें भगवान के साथ एकता और प्रेम की अनुभूति में ले जाता है। यह परिक्रमा हमें गिरिराज भगवान के महत्वपूर्ण लीलाओं की स्मृति में डालता है और हमें धार्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करता है।

गोवर्धन पर्वत का इतिहास और महत्व अद्भुत हैं, जब भगवान कृष्ण ने इस पर्वत को अपने हाथों में उठा लिया था और गोकुल के वासियों को समुद्र के प्रवाह से बचाया था। इस घटना ने गोवर्धन पर्वत को भगवान कृष्ण के प्रति अत्यंत प्रेमभाव से भर दिया था।

गोवर्धन परिक्रमा में हम इस अत्यंत पवित्र पर्वत को चूमकर, देखकर, और उसके चारों ओर चलकर उस महत्वपूर्ण क्षण की भावना करते हैं, जब भगवान ने अपनी भक्ति और प्रेम के साथ इसे अपनाया था।

गोवर्धन परिक्रमा का मकसद है हमें जीवन में सत्य, न्याय, और प्रेम के मूल्यों का आदान-प्रदान करना और उन्हें अपनाना। यह हमें धर्मिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है और हमें बताता है कि सच्चे प्रेम में ही आत्मा का असली समर्पण होता है।

गोवर्धन परिक्रमा का अद्वितीय और पावन संबंध हमें यहां पहुँचाता है, जहां हम अपने आप को अपने प्रभु के साथ एक समर्पित भक्त के रूप में महसूस करते हैं। यह एक भावनात्मक सफर है जो हमें सत्य की खोज में ले जाता है और हमारी आध्यात्मिक उन्नति का मार्गदर्शन करता है। Govardhan Parikrama

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गोवर्धन परिक्रमा कैसे की जाती है और वह कितनी लंबी है Govardhan Parikrama Kaise Ki Jati Hai Aur Wo Kitni Lambi Hai

गोवर्धन परिक्रमा का सफर एक अत्यंत पावन और भावनात्मक अनुभव है, जो हमें गिरिराज भगवान के सानिध्य में ले जाता है। यह साधना का सफर नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का सफर है, जिसमें हम अपने आप को भगवान के प्रति समर्पित करते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा की शुरुआत गोवर्धन पर्वत के पवित्र पथ से होती है, जहां भक्तजन गिरिराज की पूजा करते हैं और उनके चरणों में समर्पित होते हैं। इसके बाद, परिक्रमा का संगीत अनुरूप गूंथा जाता है, जिसमें भक्तजन गोवर्धन पर्वत की चारों ओर चलते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा की लंबाई करीब 21 किलोमीटर है और यह गोवर्धन पर्वत की पूरी परिधि को घेरता है। यह यात्रा महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करती है, जैसे कि मानसी गंगा, दान घाटी, गोपाल कुंड, शीला कुंड, और गोविंद कुंड।

यात्री धार्मिक गानों और कीर्तनों के साथ गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं, जिसमें हर कदम पर भगवान की महिमा गाई जाती है। इस सफर में हम गोपियों और गोपालों की भावना को महसूस करते हैं, और गिरिराज की लीलाओं को याद करके हमारे दिल को छू जाती है।

गोवर्धन परिक्रमा एक अद्वितीय अनुभव है, जो हमें भगवान के साथ एकता और प्रेम की अद्वितीय भावना में ले जाता है। इस सफर में हम अपने आप को ध्यान और समर्पण के साथ महसूस करते हैं, और गोवर्धन पर्वत की क्रीड़ाओं के माध्यम से हमें भगवान के साथ एक अद्वितीय जीवन की महत्वपूर्णता का अहसास होता है। Govardhan Parikrama

गोवर्धन परिक्रमा पूरी करने के लिए कितना समय लगता है Govardhan Parikrama Poori Karne Ke Liye Samay Kitna Lagta Hai

गोवर्धन परिक्रमा पूर्ण करने का समय एक अद्वितीय और भावनात्मक अनुभव है, जो हमें भगवान के सानिध्य में ले जाता है। यह यात्रा श्रद्धालुओं को गोवर्धन पर्वत की पूरी परिधि को प्रदक्षिणा करने का अद्वितीय अवसर प्रदान करती है।

गोवर्धन परिक्रमा पूर्ण करने में समय यात्री की भावनाओं और स्थान की चाल-चलन के आधार पर बदल सकता है, लेकिन सामान्यत: इसे पूरा करने में कुल लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है। यह यात्रा धीरे-धीरे, भक्तिभाव से चलते हुए, महत्वपूर्ण स्थलों की पूजा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है।

इस समय के दौरान, यात्री भगवान कृष्ण और गिरिराज भगवान की लीलाओं का स्मरण करते हुए, भगवान के प्रति उनके भक्तिभाव को महसूस करते हैं। गोपियों और गोपालों की भावना को निभाते हुए वे गोवर्धन पर्वत के पवित्र पथ पर चलते हैं और अपने मन, वचन, और क्रियाओं से भगवान के साथ एक होते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा का समय, यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति और साधना का समय है, जो हमें अपने आत्मा के साथ संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस सफर में हम अपने सभी अनर्घ्य भावनाओं को साथ लेकर, भगवान के प्रति अद्वितीय प्रेम की ओर बढ़ते हैं | Govardhan Parikrama

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